फेंक पाकिस्तानी एजेंट आ गए अमृतपाल के समर्थन में, कनाडाई खालिस्तानी WSO ने भारत सरकार पर आरोप लगाए

Delhi: पंजाब में केंद्र सरकार की एजेंसियों और पंजाब पुलिस ने खालिस्तानियों के ‘वारिस दे पंजाब’ के मुखिया अमृतपाल और उसके गुर्गों के खिलाफ़ ताबड़तोड़ धरपकट शुरू कर दी है। पंजाब पुलिस ने 78 से अधिक अमृतपाल के और खालिस्तान समर्थकों को गिरफ्तार किया। इनमें 4 को वायुसेना के जहाज से असम जेल में रखा गया।

इन सब करवाईओं को देखकर कनाडा में बैठे भारत विरोधी खालिस्तानियों में चिंता बढ़ गई, उन्हें अब लग रहा है कि उनकी वर्षो की मेहनत चंद दिनों में सरकारी हंटर साफ़ कर देगा।

इसी पर कनाडाई खालिस्तानी संगठन WSO (World Sikh Organization) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है, उसने अमृतपाल सिंह को सिख नेता बताते हुए, उसके गिरफ्तार करने और पंजाब में सुरक्षा अभियान की निंदा की है।

इस खालिस्तानी संगठन ने अपने पंजाब में मंसूबे खत्म होते देख कहा कि भारतीय अधिकारियों ने “हिंसा के लिए सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा” के नाम पर पूरे पंजाब में इंटरनेट सेवाओं के बड़े पैमाने पर निलंबन की घोषणा की है। जबकि ऐसा पुलिस ने पाकिस्तानी एजेंटों के फेक खबरों से बचाने के लिए किया है।

जो अमृतपाल कभी गुरू ग्रंथ साहिब को ढाल बनाकर पुलिस पर हमला कर रहा था, अब वहीं पुलिस से डर कर भाग रहा है। वारिस दे पंजाब का मुखिया पाकिस्तान का एक मुखौटा है, जिसने भारत की संप्रभुता को ललकारा और सरकार को धमकाने की कोशिश की। लेकिन जब सरकार का डंडा चलता है तो बड़े बड़े भूमाफिया तबाह हो जातें हैं। ऐसा ही कुछ अमृतपाल के साथ हुआ। इसको लगा कि वह कुछ भी भारत और सरकार के खिलाफ़ ज़हर उगल लेगा। लेकिन सरकार उसका कुछ नहीं कर सकती, परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ और सरकार का डंडा पंजाब में शुरू हो गया। सारे खालिस्तानी अपने अपने बिलों में दुबक गए।

तभी तो इसकी तपिश कनाडा में देशद्रोहियों तक पहुंच रहीं है, WSO अमृतपाल सिंह को लेकर चिंतित है, उसको लग रहा है कि उसकी हत्या कर दी जाएगी। उसने आरोप लगाए कि पंजाब पुलिस 80 से 90 के दशक की तरह निर्दोष खालिस्तानी सिख कार्यकर्ताओं मारा जा रहा।

WSO ने आगे कहा कि वह कनाडा सरकार से भारत की जवाबदेही की मांग करते हैं और पंजाब में नागरिक अधिकारों और इंटरनेट सेवाओं की तत्काल बहाली की मांग करेंगे।

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